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भरत तिवारी एनकाउंटर पर गरमाई राजनीति, चिराग पासवान बोले- आत्मसमर्पण करने वाले को मारना हत्या

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भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि भरत तिवारी आत्मसमर्पण कर रहे थे तो उन्हें गोली मारना कानून और लोकतंत्र के खिलाफ है।

भोजपुर/आलम की खबर:भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब राजनीतिक रूप से नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस पूरे मामले में बिहार पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण कर रहा था तो उसे गोली मारना कानून और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ है। उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी और वह स्वयं मुख्यमंत्री से इस विषय पर बात करेंगे।

शुक्रवार को चिराग पासवान भोजपुर जिले के बिलौटी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। घर पहुंचते ही भावुक माहौल बन गया। मृतक की मां, पिता और बहन केंद्रीय मंत्री को देखते ही रो पड़े। चिराग पासवान ने परिवार को सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में एक बेहद चिंताजनक परंपरा की शुरुआत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई आरोपी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने आता है तो पुलिस का दायित्व उसे गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश करना है। किसी भी व्यक्ति को बिना न्यायिक प्रक्रिया के गोली मार देना कानून के शासन के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार देता है। यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर अपराध के आरोप भी हों तो उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए। किसी भी कथित एनकाउंटर को न्याय का विकल्प नहीं माना जा सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून सर्वोच्च है और पुलिस को भी उसी दायरे में कार्य करना चाहिए।

चिराग पासवान ने कहा कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनकी गिरफ्तारी शीघ्र होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिलकर इस पूरे मामले की जानकारी देंगे और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष एवं सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

इस दौरान भरत तिवारी के पिता ने कहा कि चिराग पासवान के गांव आने से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। वहीं भरत की मां ने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अब वापस नहीं आएगा, लेकिन यदि दोषियों को कठोर दंड मिलता है तो भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल एनकाउंटर की परिस्थितियों की ही नहीं बल्कि इससे जुड़े हर पहलू की जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना था कि पीड़ित परिवार की आंखों में जो दर्द है, उसका जवाब केवल निष्पक्ष जांच और न्याय से ही दिया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले चिराग पासवान ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। इसके बाद वह पटना पहुंचे और फिर भोजपुर जाकर पीड़ित परिवार से मिले। लगातार हो रही इन बैठकों और मुलाकातों के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा में आ गया है।

इधर इस मामले से जुड़ा एक और दावा भी सामने आया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि जवनिया गांव के विस्थापितों के पुनर्वास पर खर्च हुए लगभग 1400 करोड़ रुपये से जुड़े कथित घोटाले के कुछ अहम सबूत भरत तिवारी के मोबाइल फोन में मौजूद थे। हालांकि इस दावे की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या जांच टीम ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चिराग पासवान ने कहा कि यदि इस तरह के आरोप सामने आए हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए।

फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस जांच जारी है। दर्ज एफआईआर, संभावित गिरफ्तारियां और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच, सरकार की अगली कार्रवाई और इस मामले में होने वाले कानूनी घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के शासन, मानवाधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। यदि किसी एनकाउंटर को लेकर सवाल उठते हैं तो निष्पक्ष जांच ही लोकतंत्र में जनता का भरोसा बनाए रख सकती है। साथ ही, बिना आधिकारिक पुष्टि वाले किसी भी दावे की जांच तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

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